राजपूत कौन थे ?

चलिए आपको बताया जाए, कौन थे राजपूत ??

इस आभासी दुनिया मे मात्र सत्तर साल की गुलामी में भारतीय इतने बावले हो गए है, की अपने असली मालिको को भूल चुके है, जिनकी कृपा पाकर तुम्हारे पूर्वज जिन्हें अपना बाप " बप्पा रावल " कह गए, आज कुछ निर्लज्ज औलादे उन्ही रजपूतो को गालिया देती है ...
हमेशा की तरह एक ही सवाल ...
अगर राजपूत इतने ही वीर थे, तो भारत गुलाम क्यो हो गया ?
तो सुनो ... महाभारत के बात कितनी सभ्यताओं का जन्म हुआ है, कितने प्रकार के पंथ थे, वह सब आज कहाँ है ? कहाँ गए वह सुमेरियन लोग ? कहाँ गए यूनानी, कहाँ गया रोमन साम्राज्य ? कहाँ गया उनका धर्म ? इस्लाम और ईसाइयत तो कल की मुर्गी है, उससे पहले कितने कितने भयानक आक्रमण हुए, इसका अंदाजा इन कथाकथित ज्ञानियों को है ?
जब सिकन्दर विशाल सेना लेकर भारत पर चढ़ आया था, जब सारा विश्व उस योद्धा को अजेय मान चुका था, जब शैतान ने खुद को ईश्वर कहना शुरू कर दिया था, तब उस सिकन्दर को भारत की भूमि से रगेद कर मारने वाला वीर पर्वतराज पुरषोतम पुरु एक राजपूत ही था । जिसके शौर्य के आगे पूरे विश्व की सेनाय नतमस्तक हो गई वह भारत का वीर पुरूष पोरस राजपूत ही था ।
जिस समय शक चारो ओर से भारत पर कब्जा करके बैठ गयी, ओर तुम्हारे धर्मभक्ति की बत्ती बन गयी थी, उस समय शको को जड़ से खत्म करने वाले विक्रमजीत सिंह परमार उर्फ विक्रम संवत के स्थापक विक्रमादित्य परमार रजपूत ही थे ।
नदियों को चैनलाइज करने वाले राजा राजपूत महाराज भोज थे, जिनके कारण भारत मे बहुत सी सुविधा हमे ईश्वर प्रदत्त लगती है, जबकि वह मेहनत हमारे लिए राजपूत राजाओं ने की थी । नदियों को चैनलाइज करने में इंजीनियर खुद भोज परमार थे ।
यह सब तो केवल कुछ सालों के राजा है, महाभारत का भीष्म, अर्जुन या खुद कृष्ण, यह सब भी राजपूत ही थे, किसे गालिया दे रहे हो ? किसे अयोग्य ठहराने के प्रयास कर रहे हो ? जानते भी हो, भारतीयों को तो गोरवान्वित होना चाहिए, की श्री राम और कृष्ण के रक्त वंशज आज भी आपके साथ है , आप उनसे मित्रता कर सकते है, उनसे शत्रुत्ता कर सकते है । यह सब आपका सद्भाग्य है ....
उसके बाद कल तक लड़ने वाले चंद्रगुप्त मौर्य, महाराणा कुम्भा, मिहिरभोज प्रतिहार, सम्राट पृथ्वीराज चौहान हो या महाराणा_प्रताप हो या शिवाजी, या दुर्गादास_राठौड़, यह सब किस जाति के थे ?? जिनके कारण तुम आज हिन्दू हो ?
15 साल में अरब इस्लामिक हुआ, 50 साल में यूरोप ईसाई , लेकिन यहां 800 साल मुगल रहे, 200 साल ईसाई, फिर भी हम आज 100 करोड़ है .... क्या यह ऐसे ही हुआ ?
सोचकर देखो.....

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