महाबली योद्धा धीर सिंह पुंडीर

#महाबली_योद्धा_धीर_सिंह_पुंडीर
जब धीर सिंह पुण्डीर आश्विन मास में देवी की आराधना के लिए जालंधर गए हुए थे , तब जैत्र परमार ने इसकी सूचना गौरी को भेजकर उसकी मंशा बता दी| 🚩
गौरी के चुने हुए सैनिकों ने भगवा वस्त्र धारण कर छल से धीर सिंह पुण्डीर को पकड़ लिया और गजनी ले जाकर गौरी के दरबार में प्रस्तुत किया|🚩
गौरी ने जब धीर सिंह पुण्डीर को उसे पकड़ने वाली प्रतिज्ञा पर बात की तो धीरसिंह पुण्डीर ने पूर्ण आत्म-विश्वास के साथ उसे वीरोचित जबाब दिये| गौरी ने धीर सिंह पुण्डीर की वीरता, निडरता और साहस से प्रभावित होकर उसे सम्मानित करते हुए घोड़े, वस्त्र, बख्तर-पाखर-होय और टंकार करता धनुष आदि भेंट देकर कहा कि- “हे सनातन धर्म वीर " ! इन्हें तू ले जा और जंग के लिए तैयार हो जा, मैं भी अपने वीरों के साथ तुमसे युद्ध करने के लिये शस्त्र धारण कर पीछे- पीछे आता हूँ , |” इस तरह गौरी ने एक वीर पुरुष को विदा किया और भारत के सनातन धर्म अनुयायी सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर हमले की तैयारी में जुट गया|
गौरी ने एक बार फिर सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर विजय की कामना करते हुए चढ़ाई की| सूचना मिलने पर सनातन धर्मी सम्राट ने चामुण्ड राय दाहिमा के नेतृत्व में साठ हजार सैनिकों को पानीपत के मैदान में गौरी को दण्डित करने भेजा| धीर सिंह पुण्डीर ने भी अपने ३००० पुण्डीर वीरों के साथ उस युद्ध में शामिल हुए| युद्ध आरम्भ होते ही धीर सिंह पुण्डीर ने अपने लक्ष्य शाहबुद्दीन गौरी के सामने जा पहुंचे| गौरी ने धीर सिंह पुण्डीर को देखते ही घोड़े से उतर कर हाथी पर सवार हुआ| धीर सिंह पुण्डीर ने अपने वीरों के साथ भयंकर हमला कर गौरी की सेना में खलबली मचा दी| देखते ही देखते धीर सिंह पुण्डीर ने गौरी के हाथी पर तलवार के एक ही वार कर उसका सुंड शारीर से अलग कर दिया| हाथी के लुढकते ही त्वरित गति से गिरते हुए बादशाह गौरी के सीने पर चढ़ बैठा, तभी जैत्र परमार ने गौरी के छत्र, चिन्ह आदि छीन लिए| इस तरह गौरी धीर पुण्डीर की बांहों में कैद हो गया| उसकी सेना में भगदड़ मच गई| यह युद्ध इतना भयंकर था कि हजारों पठानों व अन्य सैनिकों के साथ १४०० पुण्डीर वीर गति को प्राप्त हुए |
युद्ध के छठे दिन धीर सिंह पुण्डीर ने गौरी को सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समक्ष दरबार में पेश कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की|🚩🚩
🚩क्षत्रिय धर्म युगे युगे 🚩
जय राजपूताना 🏹
💪एक बनों नेक बनों💪

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