Maharaja Hari Singh: जानिए कश्मीर के आखिरी राजा के बारे में सबकुछ
Maharaja Hari Singh: जानिए कश्मीर के आखिरी राजा के बारे में सबकुछ
महाराजा हरि सिंह का जन्म 21 सितंबर 1895 को जम्मू के अमर पैलेस में
हुआ था। महाराजा अमर सिंह के सबसे छोटे बेटे हरि सिंह ने 23 सितंबर 1925 को
जम्मू कश्मीर रियासत की राजगद्दी संभाली। हरि सिह ने अपने जीवन काल में 4
शादियां की थीं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लेखक कर्ण सिंह इन्हीं के बेटे
हैं।
13 साल की उम्र में हरि सिंह को अजमेर के मायो कालेज में पढ़ने के लिए
भेज दिया गया था। इसके अगले ही साल हरि सिंह के पिता महाराजा अमर सिंह की
मृत्यु हो गई जिसके बाद उनके चाचा प्रताप सिंह को जम्मू कश्मीर का राजा
बनाया गया। 20 साल की उम्र में हरि सिंह को जम्मू रियासत का मुख्य सेनापति
नियुक्त किया गया
हरि सिंह प्रगतिशील ख्याल के इंसान थे। उन्होंने 1925 में महाराजा
बनने के बाद राज्य में बाल विवाह पर बैन लगा दिया। इसके अलावा उन्होंने
राज्य में सभी के लिए प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया जिसे एक बड़े
फैसले के रूप में जाना जाता है। हरि सिंह ने दलित समुदाय के लोगों के लिए
मंदिरों के दरवाजे खुलवाए। इसके अलावा भी हरि सिंह ने अपने सेवाकाल में
जातिप्रथा, वेश्यावृत्ति रोकने समेत कई सामाजिक सुधारों के लिए काम किया।
हरि सिंह को आजादी के बाद जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक जम्मू का राष्ट्रपति बनाया गया। बाद में यह पद राज्यपाल में बदल दिया गया। हरि सिंह ने अपने जीवन के आखरी पल जम्मु में अपने हरि निवास महल में बिताया। उन्की मृत्यु 26 अप्रैल 1969 को मुंबई में हुई। उनकी इच्छानुसार उनकी राख को जम्मू लाया गया और तावी नदी में बहा दिया गया।
हरि सिंह को आजादी के बाद जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक जम्मू का राष्ट्रपति बनाया गया। बाद में यह पद राज्यपाल में बदल दिया गया। हरि सिंह ने अपने जीवन के आखरी पल जम्मु में अपने हरि निवास महल में बिताया। उन्की मृत्यु 26 अप्रैल 1969 को मुंबई में हुई। उनकी इच्छानुसार उनकी राख को जम्मू लाया गया और तावी नदी में बहा दिया गया।



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