शूरवीर क्षत्रिय वीरों की गाथाएँ
✍️ सम्राट पृथ्वीराज चौहान ब्रहाण्ड में राजा दशरथ के बाद दुसरे धनुषधर थे. जो शब्दभेदी बाण चलाने में निपुण थे. 52 उँगल माप का मोली ( नाल,,धागा ) हाथ पर बँधता था.महापराकर्मी के साथ-साथ बड़ी विशाल काया के धनी थे. हिन्दुत्व सम्राट पृथ्वीराज चौहान.....!!
✍️. जयमाल मेड़तिया ने एक ही झटके मेंहाथी का सिर काट डाला था....!!
✍️. करौली के जादोन राजा अपने सिंहासन पर बैठते वक़्तअपने दोनो हाथ जिन्दा शेरो पर रखते थे...!!
✍️. जोधपुर के यशवंत सिंह के 12 साल के पुत्र
पृथ्वी सिंह ने हाथो से औरंगजेब के खूंखार भूखे
जंगली शेर का जबड़ा फाड़ डाला था.....!!
✍️. राणा सांगा के शरीर पर छोटे-बड़े 80 घाव थे,युद्धों में घायल होने के कारण उनके एक हाथ नही था एक पैर नही था, एक आँख नहीं थी उन्होंने अपने जीवन-काल में 100 से भी अधिक युद्ध लड़े थे....!!
✍️. एक राजपूत वीर जुंझार जो मुगलो से लड़ते वक्त शीश कटने के बाद भी घंटो लड़ते रहे आज उनका सिर बाड़मेर में है,जहा छोटा मंदिर हैंऔर धड़ पाकिस्तान में है....!!
✍️. रायमलोत कल्ला का धड़ शीश कटने के बाद लड़ता-लड़ता घोड़े पर पत्नी रानी के पास पहुंच गया था तब रानी ने गंगाजल के छींटे डाले तब धड़ शांत हुआ उसके बाद रानी पति कि चिता पर बैठकर सती हो गयी थी.....!!
✍️. चित्तोड़ में अकबर से हुए युद्ध में जयमाल राठौड़ पैरजख्मी होने कि वजह से कल्ला जी के कंधे पर बैठ कर युद्ध लड़े थे, ये देखकर सभी युद्ध-रत साथियों को चतुर्भुज भगवान की याद आयी थी,
जंग में दोनों के सर काटने के बादभी धड़ लड़ते रहे और राजपूतो की फौज ने
दुश्मन को मार गिराया अंत में अकबर ने
उनकी वीरता से प्रभावित हो कर जैमलऔर कल्ला जी की मुर्तिया आगरा के किलें में लगवायी थी......!!
✍️. राजस्थान पाली में आउवा के ठाकुर खुशाल सिंहअजमेर जा कर अंग्रेज अफसर का सर काट कर ले आये थे और उसका सर अपने किले के बाहर लटकाया था तब से आज दिन तक उनकी याद में मेला लगता है.....!!
✍️. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलो था और कवच का वजन 80 किलो था और कवच, भाला, ढाल, और हाथ मे तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो था.....!!
✍️. सलूम्बर के नवविवाहित रावत रतन सिंह चुण्डावतजी ने युद्ध जाते समय मोह-वशअपनी पत्नी हाड़ा रानी कीनिशानी मांगी तो रानी ने सोचा ठाकुर युद्ध में मेरे मोह के कारण नही लड़ेंगे तब रानी ने निशानी के तौर पर अपना सर काट के दे दिया था,अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका औरंगजेब की सेना के साथ भयंकर युद्ध.....!!
किया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए अपनी मातृ भूमि के लिए शहीद हो गये थे.....!!
✍️. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक थे फिर भी अकबर.की मुगल सेना पर भारी पङे थे .....!!


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